भारतीय नारी 2.0

सुनो भारत देश की
नयी निराली ये दास्ताँ हैं

अपनी शीला नाजुक है नादान हैं
क्योंकि, वो अभी अभी हुई जवान है

मुन्नी की तो बात न पूछो
वो गली गली बदनाम है |

कल तक जो रज़िया राज करती थी
वो अब गुंडों से परेशान हैं

धन्नो बेचारी, उसके होने वाले हाल
को सोच कर परेशान है |

वक़्त की नयी बयार है ये
नयी दौर का नया इम्तेहान है
कल तक जिनसे घर की शोभा थी
वो अब बस आइटम हैं, सामान हैं |

About Rakesh

Hi, This is Rakesh, welcome to my web-log.
यह प्रविष्टि Random Ramblings में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

भारतीय नारी 2.0 को 2 उत्तर

  1. brucemurray79069 कहते हैं:

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