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डाकिये की तलाश

डाकिया बाबु भी अपना रूप बदल चुके हैं. आते तो हैं हर महीने मगर, किसी का पैगाम नहीं लेकर बल्कि क्रेडिट कार्ड का बिल लेकर.
मगर फिर भी दिल में एक उम्मीद रहती है, की कभी ना कभी, कोई ना कोई, गलती से ही सही, एक पत्र तो डालेगा ही. पढना जारी रखे

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शान से चलो !!

क्यों फिक्र गिरने की जब बादलों को छूने का हौसला है तुम में , बस  निडर बनो और बढ़ चलो नहीं होते परवाज़ सभी के पास, लग जायेंगे पंख पैरों में , उड़ने की चाह  लेकर  बस उड़  चलो | … पढना जारी रखे

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