ओ री चिरईया नन्ही सी चिड़िया अंगना मे फिर आ जा रे …
ओ री चिरईया नन्ही सी चिड़िया अंगना मे फिर आ जा रे …
अँधियारा है घना और लहू से सना
किरणों के तिनके अंबर से चुनके
अंगना मे फिर आ जा रे
हमने तुझपे हजारों सितम हैं किए
हमने तुझपे जहां भर के जुल्म किए
हमने सोचा नहीं, तू जो उड़ जाएगी
ये ज़मीन तेरे बिन सूनी रह जाएगी
किसके दम पे सजेगा मेरा अंगना
ओ री चिरईया मेरी चिरईया अंगना मे फिर आ जा रे …
तेरे पंखों मे सारे सितारे जड़ूँ
तेरे चूनर धनक सतरंगी बुनूँ
तेरे काजल मे मैं काली रैना भरून
तेरी मेहंदी मे मैं कच्ची धूप मलूँ
तेरे नैनों सजा दूँ नया सपना
ओ री चिरईया मेरी चिरईया अंगना मे फिर आ जा रे !
ओ री चिरईया नन्ही सी चिड़िया अंगना मे फिर आ जा रे
ओ री चिरईया ।


Unique…. Rakesh…….